मुख्यपृष्ठ

संपादकीय

 

 

      इस वेबसाइट का उद्देश्य हिन्दी वेबसंसार को भली-भाँति परीक्षा किए हुए वेदान्ती जीवन दर्शन का ज्ञान कराना है । इसका अनुसरण करने से संसार का कोई भी व्यक्ति क्रमशः विकास करते हुए आनन्द के उच्च स्तर का श्रेष्ठतम् जीवन जी सकता है ।

       वेदान्त का अर्थ है वेदों का अंतिम निर्णीत सिद्धान्त । वेद चार है ऋग, साम, यजुर और अर्थव । इनकी गणना संसार के प्राचीन और सर्वश्रेष्ठ साहित्य में की जाती है।  इसमें प्रतिपादित सत्य सार्वभौमिक और सार्वकालिक है । सभी देशों के मूर्धन्य विद्धानों ने इसे स्वीकार किया है । इस ज्ञान से मनुष्य मात्र को परिचित कराना हमारा सबसे बडा धर्म है ।

 

      वेदान्त -दर्शन का विवेचन अनेक आचार्यों ने देश काल के अनुरुप सर्व सुलभ रुप में किया है । हम यहाँ आदि शंकराचार्य की व्याख्या का अनुसरण करेंगे ।उनका जीवन काल 1200 वर्ष पूर्व माना जाता है । उन्होंने वेदान्त ग्रन्थों पर भाष्य लिखे और मधुर भाषा में छन्दबद्ध स्वतन्त्र ग्रन्थ भी लिखे ।

 

      इस वेदान्ती जीवन दर्शन का ज्ञान प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित विषयों का अध्ययन करना चाहिए ।

 

परम सत्  कर्म -सिद्धान्त  विचार
जगत  पुनर्जन्म  तत्व -ज्ञान
जीव  उपासना  सर्वात्म - भाव

 इनको समझने के लिए वेदान्त तालिका देखें ।